सेंट सारंग कॉन्वेंट स्कूल में 77वाँ गणतंत्र दिवस, संविधान की मार्गदर्शक भूमिका और नागरिक कर्तव्यों पर ज़ोर
सैयद सरावां: सेंट सारंग कॉन्वेंट स्कूल, सैयद सरावां में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में छात्र-छात्राओं ने भाषणों, देशभक्ति गीतों, परेड और मंच प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संकल्प व्यक्त किया कि वे भारत के संविधान के मार्गदर्शन में ज़िम्मेदार नागरिक बनकर देश की प्रगति में सकारात्मक भूमिका निभाएँगे। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कहा, “आजादी हमारा गौरव है, संविधान हमारा मार्गदर्शक है और एकता हमारी शक्ति है।”

यह कार्यक्रम 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में स्कूल परिसर में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति की भावना, अनुशासन और संवैधानिक जागरूकता को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुख रूप से उभरा कि संविधान न केवल मूल अधिकारों की गारंटी देता है, बल्कि मूल कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए क़ानून का पालन, ईमानदारी और एकता अनिवार्य हैं।
कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका इक़रा फ़ातिमा ने किया। प्रारंभ में राष्ट्रभाव से ओतप्रोत प्रार्थना “लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी” प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात स्कूल के संरक्षक आरिफ़-बिल्लाह शैख़ अबू सईद सफ़वी और मैनेजर साजिद सईदी के कर-कमलों से राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया तथा उपस्थित जनों ने सम्मानपूर्वक राष्ट्रगान “जन गण मन” का सामूहिक गायन किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने मार्च-पास्ट के माध्यम से अनुशासन और एकता का परिचय दिया।

इसके उपरांत कक्षा सात के छात्र अबराह सरवर ने गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, जो देश की रीढ़ है और नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे मूल अधिकार प्रदान करता है। इसके बाद कक्षा आठ की छात्रा जुवैरिया खातून ने हिंदी में अपने भाषण में संविधान की मूल्य-व्यवस्था, स्वतंत्रता, समानता और उत्तरदायित्व को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद बताया और युवा पीढ़ी को देश के भविष्य का संरक्षक कहा।
इसी क्रम में एक लघु मंच नाटक “गिफ्ट ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन” प्रस्तुत किया गया, जिसमें मूल अधिकारों और कर्तव्यों की व्यावहारिक महत्ता को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। इसके बाद देशभक्ति गीत “मैं मर भी जाऊँ तो वतन ये याद रहेगा” प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात कक्षा छह की छात्रा राहिला बानो ने उर्दू भाषण में कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय, समानता और आपसी सम्मान पर आधारित एक संपूर्ण व्यवस्था है; यदि नागरिक अपने कर्तव्यों को भूल जाएँ तो अधिकार भी अर्थहीन हो जाते हैं। इसके बाद कक्षा सात की छात्रा बुशरा फ़ातिमा ने कविता के माध्यम से शांति, एकता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
समारोह के समापन पर स्कूल समन्वयक मिस नेहा ने प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का आभार व्यक्त किया तथा सभी से एकता, सम्मान और देशभक्ति की भावना को सदैव जीवित रखने का आह्वान किया।
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