ख्वाजा ग़रीब नवाज़ ने भारत में भाईचारा और मोहब्बत को आम किया: शेख़ हसन सईद सफ़वी

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ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ हज़रत मोईनुद्दीन हसन संजरी भारतीयों के मोहसिन इस धरती पर इस्लाम की दावत को आम करने वाले और भाईचारे व मोहब्बत की शमा रोशन करने वाले हैं हिन्दुस्तान में रहने वाले ख्वाजा साहब के इस एहसान को कभी भूल नहीं सकते और न ही ख्वाजा साहब के भाईचारे और प्रेम के पाठ का अनुसरण किए बिना देश की अखंडता और मुसलमानों की एकता की राहें खुल सकती हैं। इन ख़्यालात का इज़हार आज खनक़ाह ए आरिफिया के वलि अह्द मौलाना हसन सईद सफ़वी ने जामिया आरिफिया सैयद सरावां में उर्स ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के अवसर पर किया

उन्होंने कहा कि खनक़ाह ए आरिफिया हजरत ख्वाजा के सिलसिले की खनक़ाह हैं और उसके साहब सज्जादा दाई ए इस्लाम शेख अबू सईद सफ़वी ख्वाजा साहब के ही नक्शे कदम पर चलने वाले और उन्हीं की रोशनी को आम करने में लगे हैं और हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम सब इस मिशन का हिस्सा बनें।

जामिया के उस्ताद मौलाना ज़ियाउर्रहमान ने अपने प्रारंभिक भाषण में कहा कि अल्लाह के नेक बंदे और नबी के सच्चे प्रतिनिधि लोगों के सामने अल्लाह की आयतों और उसकी खुदाई का जिक्र करते हैं, लोगों के दिलों से गंदगियों को साफ करते हैं और धर्म इस्लाम की शिक्षाओं से अवगत करते हैं। हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ उन्हीं नेक बंदों में से थे जिन्होंने अल्लाह के बन्दों के संबंध अल्लाह से मजबूत किए और कुफ्र व शिर्क का सफाया करके एकता को लोगों के दिलों में बसाया

जामिया आरिफिया के नाएब प्रिन्सिपल मुफ्ती किताबुद्दिन रिजवी ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम ख्वाजा साहब के मिशन को आम करें। हम सब खुद भी चिश्ती रंग में रंग जाएं और इस रंग को इतना आसान कर लोगों तक पहुंचाएं कि कोई इस रंग में रंगने से बाकी न बचे .लेकिन सवाल है कि चिश्ती रंग क्या है? तो चिश्ती रंग यह है कि गैर परिचित जगह पर गैर परिचित भाषा में गैर परिचय लोगों के बीच अल्लाह के रसूल के लाए हुए दीन पर ऐसे जमे रहना के दूसरा प्रभावित हुए बिना न रह सके। दीन की यह सरल और व्यावहारिक पेशकश इतनी शोषक है कि संबोधित या तो दीने हक़ को स्वीकार कर लेता है या न्यूनतम उनसे घृणा करना छोड़ देना है। इन ख़्यालात का इज़हार आज जामिया आरिफिया में मुफ्ती मोहम्मद किताबुद्दिन रिजवी ने किया

गौरतलब है कि जामिया आरिफिया में जश्न ए ख्वाजा महाराजा की शुरआत क़ारी सरफ़राज़ सईदी अज़हरी की तिलावट ए क़ुरान ए पाक से हुआ, उसके बाद जामिया के छात्र मोहम्मद दानिश ने ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की शान में मनक़बत के शेर पेश किए साथ ही जामिया के उस्ताद मौलाना रिफ़अत रजा नूरी ने दाई ए इस्लाम की ख्वाजा साहब की शान में लिखी मनक़बत को भी पेश काइया आख़िर में जामिया आरिफिया के प्रमुख दाई ए इस्लाम शेख अबू सईद शाह एहसनुल्लाह मुहम्मद सफ़वी की दुआओं पर महफ़िल संपन्न हो गई।

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