जामिया अरिफिया में ग़ज़ाली डे का तेरहवां वार्षिक शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिता समाप्त हुआ।

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 प्रतियोगिता में सफल छात्रों को जामिया के संस्थापक दाई ए इस्लाम के हाथों सर्टिफिकेट और शील्ड से सम्मानित किया गया।

जामिया अरिफिया, सय्यद सरावां में 25 दिसंबर से 29 दिसंबर के बीच छात्रों का वार्षिक शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिता समाप्त हुआ। जमीयत-अल-तलबा द्वारा आयोजित गज़ाली डे प्रतियोगिता में लगभग 450 छात्रों ने भाग लिया। 29 जनवरी को इख्तितामी प्रोग्राम आयोजित किया गया था जिसमें कामयाबी हासिल करने वालों को पुरस्कार दिए गए। जिन छात्रों को कामयाबी मिली है उनके नाम इस प्रकार है:

हिफ्ज़ ए क़ुरान हस्ब ए दरस मुकाबला में सय्यद मुहम्मद अशरफ (हिफ्ज़), नूर मुजस्सम (हिफ्ज़), मुहम्मद मेराज अहमद (हिफ्ज़)। हिफ्ज़ ए क़ुरान मुकम्मल मुकाबला में मतलूब ज़फ़र (साबिया), मुहम्मद ओबैद रज़ा (सानिया), ज़ीशान अहमद (हिफ्ज़) तजवीद ग़ैर हुफ्फाज़ मुकाबला में मुहम्मद लारेब (एदादिया-बी), सदरे आलम (एदादिया-सी), शाहज़ेब। तजवीद हुफ्फाज़ मुकाबला में अबू साद (हिफ्ज़),नूर मुजस्सम (हिफ्ज़), मुहम्मद जावेद (हिफ्ज़)। अरबी निबंध लेखन मुकाबला में ज़ाहिद रज़ा (सादिसा), गुलाम ग़ौस (खामिसा), मोहम्मद जामी (सादिसा)। उर्दू निबंध लेखन मुकाबला में  गुलाम ग़ौस (खामिसा), अहमद सफ़ी (सामिना), शराफ़त हुसैन (सामिना) अरबी भाषण मुकाबला में वसीम अकरम (सादिसा), ज़ाहिद रज़ा (सादिसा), मतलूब ज़फ़र (साबिया)। इंग्लिश भाषण मुकाबला में वसीम अकरम (सादिसा), मुहम्मद आदिल खान (राबिया), अहमद हुसैन (राबिया)। उर्दू भाषण मुकाबला में आसिफ मुरादाबादी (सदिसा), अहमद रज़ा (सालिसा-ए), शाहवेज़ आलम (खामिसा)। हिफ्ज़ ए हदीस मुकाबला में मोहम्मद शायान रज़ा (ऊला-सी), आदिल अहमद (एदादिया-बी)। सैयद सय्यद नुरुल हसन (ऊला-सी), नहव-व-सर्फ़ मुकाबला में मुहम्मद खालिद (सालिसा), मुहम्मद हसनैन (सानिया), अलाउद्दीन (सानिया), दिलशाद रज़ा (सानिया), मोहम्मद सैफ़ (सानिया)। सामान्य ज्ञान मुकाबला में मोहम्मद उस्मान (ऊला-सी), मोहम्मद अहसन रज़ा (ऊला-ए), मोहम्मद शोएब खान (सानिया)। अंग्रेजी अरबी वार्तालाप मुकाबला में मुहम्मद अहबाब (ऊला-बी), रियाजुल सीलम (ऊला-बी), मुन्तज़िर (ऊला-बी)। उसूल ए फ़िक्ह मुकाबला में आदिल ख़ान (राबिया), मोहम्मद अकरम (खामिसा), मोहम्मद सुफियान (खामिसा), मुहम्मद कौसर आलम (सामिना)  तनवीर रज़ा (राबिया)। उसूल ए हदीस मुकाबला में मुहम्मद मोहसिन (सदिसा), मुहम्मद नौशाद (सबिया), अहमद रज़ा (सदिसा), माशूक़ अहमद (साबिया), मुहम्मद फैज़ान (सादिसा)। मुबाहिसा मुकाबला में  मुहम्मद तौसीफ़ रज़ा (दावा), मोहम्मद आसिम (दावा), शराफत हुसैन (सामिना)।

इस बार प्रोफ़ेसर सैयद अलीम अशरफ़ जैसी (मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के अरबिक डिपार्टमेंट के प्रमुख) ग़ज़ाली डे के मुख्य अतिथि थे। आपने इस शैक्षणिक और सांस्कृतिक  प्रतियोगिता के अवसर पर जामिया के अध्यापक और छात्रों को ढेर सारी मुबारकबाद दी और भाग लेने वाले सभी छात्रों को प्रोत्साहित किया। आपने कहा कि दुनिया रिज़ल्ट और परिणाम को देख सफल और असफल का फैसला करती है। लेकिन अल्लाह तआला कोशिश करने वाले और उस में ईमानदार होने वालों को इनाम देता है, इसलिए हमें चाहिए की हम काम करें और उस काम को दिल व जान से ईमानदारी के साथ अंजाम दें ताकि कामयाबी और सफलता प्राप्त हो। ज़िन्दगी की प्रतियोगिता बस यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि इस तरह के कम्पटीशन हमारे पुरे जीवन में आएंगे। अच्छे इरादों के साथ ज़िन्दगी के हर मुकाबले का सामना कर के अपने रब से अच्छा पुरस्कार प्राप्त करना हमारी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर जनाब नौशाद आलम चिश्ती (अलीगढ़) की तरतीब दी गई पुस्तक “मजलिस ए मिलाद ए मुस्तफा” का भी इजरा हुआ।

जमियत अल तलबा द्वारा सफल होने वालों के सम्मान में दाई ए इस्लाम के हाथों शील्ड और सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किए गए थे।

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